Биздин үйгө мамлекеттик суу келет, кээде андан жаман жыт чыгат. Ушундай сууну колдонуп даарат алса жана жүнүп (гусул) жуунса болобу?
Жогорудагы абалда, эгер адамда сууга карата жаман жыттын себепчиси нажас болгонунан деп так ишенич же басымдуу божомол болмоюнча, жөн гана шек менен суу булганган болуп эсептелбейт. Бирок эгер жыт, даам же түс сыяктуу үч өзгөчөлүктүн бирөөсү ачык түрдө нажасаттан улам өзгөргөнү белгилүү болсо, анда мындай суу таза эмес болуп эсептелет жана андай суу менен даарат алуу же гусул кылуу жараксыз болот.
ففی الدر المختار: فلو علم نتنه بنجاسة لم يجز، ولو شك فالأصل الطهارة والتوضؤ من الحوض أفضل من النهر رغما للمعتزلة اھ (1/ 186)
وفی حاشية ابن عابدين: (قوله: فلو علم إلخ) صرح به لزيادة التوضيح وإلا فهو داخل تحت قول المصنف وبتغير أحد أوصافه بنجس. (قوله: ولو شك إلخ) أي ولا يلزمه السؤال بحر، وفيه عن المبتغى بالغين وبرؤية آثار أقدام الوحوش عند الماء القليل لا يتوضأ به، ولو مر سبع بالركية وغلب على ظنه شربه منها تنجس وإلا فلا اهـ وينبغي حمل الأول على ما إذا غلب على ظنه أن الوحوش شربت منه بدليل الفرع الثاني وإلا فمجرد الشك لا يمنع لما فيه الأصل أنه يتوضأ من الحوض الذي يخاف قذرا ولا يتيقنه، وينبغي حمل التيقن المذكور على غلبة الظن والخوف على الشك أو الوهم كما لا يخفى. اهـ (1/ 186)
وفی الفتاوى الهندية: وفي النصاب والفتوى في الماء الجاري أنه لا يتنجس ما لم يتغير طعمه أو لونه أو ريحه من النجاسة. كذا في المضمرات. وإذا ألقي في الماء الجاري شيء نجس كالجيفة والخمر لا يتنجس ما لم يتغير لونه أو طعمه أو ريحه. كذا في منية المصلي اھ (1/ 17)
وفی الدر المختار: (و) يجوز (بجار وقعت فيه نجاسة و) الجاري (هو ما يعد جاريا) عرفا، وقيل ما يذهب بتبنة، والأول أظهر، والثاني (وإن) وصلية (لم يكن جريانه بمدد) في الأصح، (إلی قوله) (إن لم ير) أي يعلم (أثره) فلو فيه جيفة أو بال فيه رجال فتوضأ آخر من أسفله جاز ما لم ير في الجرية أثره (وهو) إما (طعم أو لون أو ريح) ظاهره يعم الجيفة وغيرها، وهو ما رجحه الكمال اھ