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Fatwa No :
35
| Date :
0000-00-00
العبادة / الصوم والرمضان /

Тиббий анализ учун рўзани бузгандан сўнг қазо ва каффорат ҳукми

Олимлар нима дейдилар, агар кимдир бир киши хорижга сафар қилиш учун тиббий анализни тўғрилаш мақсадида рўза пайтида сут ичса, бу шаръан узр ҳисобланадими? Ва бунда каффорат борми ёки йўқми? Агар каффорат бўлса, қандай бўлади?

الجوابُ حامِدا ًو مُصلیِّا ً

Тиббий анализни тўғрилаш учун рўзани бузиш жоиз эмас. Агар кимдир бир киши рўза тутиб туриб, фақат шу анализ учун бузса, унга ҳам ўша рўзани қайта тутиш (қазо) ва каффорат иккиси ҳам вожиб бўлади. Каффорат – икки ой узлуксиз рўза тутиш. Агар унга қодир бўлмаса, олтмиш муҳтож кишини икки маҳал таом билан тўйдириши керак.

مأخَذُ الفَتوی

کما فی الفتاوى الهندية: فالصائم إذا أكل الخبز أو الأطعمة أو الأشربة أو الأدهان أو الألبان أو أكل إهليلجة أو مسكا أو زعفرانا أو كافورا أو غالية عليه القضاء والكفارة عندنا هكذا في فتاوى قاضي خان اھ (1/ 205)۔
وفيه۔ا ايضا : كفارة الفطر وكفارة الظهار واحدة 1 وهي عتق رقبة مؤمنة أو كافرة فإن لم يقدر على العتق فعليه صيام شهرين متتابعين وإن لم يستطع فعليه إطعام ستين مسكينا كل مسكين صاعا من تمر أو شعير أو نصف صاع من حنطة اھ (1/ 215)۔
وفى الدر المختار : فصل في العوارض المبيحة لعدم الصوم وقد ذكر المصنف منها خمسة وبقي الإكراه وخوف هلاك أو نقصان عقل ولو بعطش أو جوع شديد ولسعة حية (لمسافر) سفرا شرعيا ولو بمعصية (أو حامل أو مرضع) (الى قوله) (أو مريض خاف الزيادة) لمرضه وصحيح خاف المرض، (2/ 421) واللہ اعلم بالصواب

واللہ تعالی اعلم بالصواب
دار الافتاء مسلم فتاوی

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